बड़े पिता जी की तेरहवीं में मृत्युभोज की जगह कराया कन्याभोज, युवा साहू समाज ने पीड़ित परिवार को नगद पुरस्कार देकर किया सम्मानित

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मध्यप्रदेश
अनूपपुर/स्वराज टुडे: मृत्युभोज का आयोजन परलोक में आस्था रखने वाला हिंदू समाज सदियों से करता आया है. ऐसी मान्यता है कि किसी परिजन की मौत के बाद ब्राह्मण को दान देने और लोगों को भोजन कराने का पुण्य मृत आत्मा को मिलता है. इससे मृत आत्मा का परलोक सुधरता है.लेकिन कुछ लोगों का कहना है कि व्यक्ति या जीव जीते जी जो अच्छा काम करता है, परोपकार करता है, दया दिखाता है, दान-पुण्य करता है और दीन-दुखियों की सेवा करता है, उसका परलोक मृत्यु के बाद अपने आप सुधर जाता है. ऐसे में मृत्यु के बाद परिजनों को जरूरी काम ही करने चाहिए. आडंबर और दिखावे से बचना चाहिए.मृत्यु भोज भी एक तरह का आडंबर है. इसे रोकने के लिए अनेक हिन्दू समाज अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं.

मृत्युभोज पर रोक लगाने की पहल आजादी के पहले से ही शुरू हो गई थी. राजस्थान ऐसा पहला राज्य है,जहां मृत्यु भोज पर कानूनी तौर पर पाबंदी है.वहां इसके लिए 1960 में ही कानून बन गया था. देश के दूसरे हिस्सों में भी इसे छोड़ने को लेकर पहल होती रहती है.

इसी तारतम्य में छत्तीसगढ़ के अनूपपुर जिले के कोतमा निवासी साहू समाज के युवा ओजस्वी समाज सेवक बिसाहू प्रसाद साहू द्वारा मृत्युभोज की प्रथा को बंद करने की बहुत ही सराहनीय एवं प्रेरणा दायक पहल की गई है।

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स्व.ददऊआ साहू, बिसाहू प्रसाद साहू के बड़े पिताजी

उन्होंने अपने पूजनीय बड़े पिता व पालक ददऊआ साहू के मृत्युपरांत तेरहवीं के दिन दिनांक  11- 02 – 2025 को मृत्यु भोज के स्थान पर कन्या भोज (केवल 11 कन्याओं ) को भोजन करा कर तेरहवीं में होने वाले फिजूल खर्चों को बंद कर समाज को एक नया संदेश दिया है।

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इस ऐतिहासिक अनुकरणीय कार्य से प्रभावित होकर युवा साहू समाज जिला अनूपपुर द्वारा बिसाहू प्रसाद साहू को 1100/-नगद पुरस्कार देकर प्रोत्साहित एवं सम्मानित किया गया है। जिला युवा साहू समाज द्वारा यह भी निर्णय लिया गया है कि जो भी समाज के व्यक्ति अपने घर में किसी परिजन की मृत्यु होने पर तेरहवीं के स्थान पर कन्या भोज करा कर ,तेरहवीं जैसे फिजूल खर्ची मृत्यु भोज को बंद करेगा, उसे जिला युवा साहू समाज द्वारा यथाउचित प्रोत्साहित किया जाएगा । सामर्थ्य अनुसार कन्या भोज के लिए कन्याओं की संख्या 1,3,5,7,9 या 11 आदि रखी जा सकती है । लेकिन ध्यान रहे तेरहवीं पर मृत्युभोज के स्थान पर कन्या भोज एक विकल्प है अनिवार्य नहीं ।

जिला युवा साहू समाज जिला अनूपपुर ने समाज के प्रबुद्ध लोगों से इस संबंध में सुझाव व सहयोग की अपेक्षा के साथ मृत्युभोज की प्रथा को बंद करने की अपील की है ।

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दीपक साहू

संपादक

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