पर्यावरण के प्रति संवेदनशील कलेक्टर कार्तिकेय गोयल की नजर पर्यावरण को दूषित करने वाले टीआरएन एनर्जी पर आखिर कब पड़ेगी..

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छत्तीसगढ़
रायगढ़/स्वराज टुडे: जिले के प्लांटो के सप्लायर बहुत ज्यादा सक्रिय है जो की पैसों के लालच में भोले-भाले किसानों को अपने बहकावे में लेकर पंचायत प्रस्ताव बनाकर पर्यावरण विभाग से फ्लाई ऐश की डंपिंग का परमिशन त्वरित ले लेते है तो कही बिना परमिशन के ही फ्लाई ऐश को भी डंप कर दिया जाता है जिससे की जिले में हर दिन शिकायत सामने आ रही है। जिम्मेदार पर्यावरण विभाग की उद्योगों पर नकेल कसने में नाकाम है यही वजह है कि जिले में चारो ओर राखड़ का पहाड़ सड़क किनारे खेत खलिहान, जंगल नदी में भी डंप हो रहा है जिससे जनजीवन अस्त व्यस्त, खेत खलिहान व रायगढ़ जिले की हवा प्रदूषित हो रही है।

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आपको बतादे की घरघोड़ा ब्लाक के भेंगरी स्थित टीआरएन एनर्जी द्वारा इन दिनों छोटेगुमडा पंचायत में किसान के निजी खेत में पर्यावरण विभाग से परमिशन तो ले लिया गया पर फ्लाई ऐश बहती हुई नाला के किनारे डंप किया जा रहा है जो की एनजीटी के नियम के विरुद्ध है क्यूंकि बरसात के दिनों में राखड़ नाला धस जायेगा और राखड़ हवा में उड़कर पानी के मिल जायेगा जिससे पानी दूषित हो जाएगा जिससे वन्य प्राणियों और गांव के गाय बैल जो नाला का पानी पाएंगे उनको इसका दुष्प्रभाव पड़ेगा ।

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वन विभाग की उदासीनता के पीछे आखिर कोई निजी स्वार्थ तो नही….

जिस जंगल रास्ते से फ्लाई ऐश को डंप करने के लिए लेजाया जा रहा था क्या वन विभाग द्वारा परमिशन लिया गया है क्यूंकि फ्लाई ऐश को जंगल के रास्ते जाने से उसके रख से मार्ग के दोनो के पेड़ पौधे राख की परत से ढक गए है जो की जिसका दुष्प्रभाव धीरे से दिखना शुरू हो जाएगा फ्लाई ऐश को जिस रास्ते से लेजाकर डंप किया जा रहा था उस जगह पानी का छिड़काव भी नही किया जा रहा था, फ्लाई ऐश को लेजाने के लिए टेंडा नवापारा, टेंडा और गुमड़ा का प्राकृतिक हृदय स्थल द्वारा मंदिर के सामने से होकर लेजाया जा रहा था जिससे ग्रामीणों में काफी आक्रोश भी है जो की जंगलों के बीच ग्रामीणों का एक देव स्थल है, जब से फ्लाई ऐश इस वन विभाग के रास्ते से लेकर जाया जा रहा है इस रास्ते और मंदिर की स्वच्छ वातावरण की दुर्दशा ही हो गई है , इस रास्ते से गुजरने वाले राहगीर भी अब डस्ट से परेशान हो गए है

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पर्यावरण विभाग द्वारा फ्लाई ऐश डंपिंग के लिए परमिशन तो दे दिया जाता है पर क्या उनके द्वारा एक बार जाकर जगह का मुआयना किया जाता जिससे की यह पता चल सके की राखड़ किस रास्ते से लेजाया जा रहा है जिससे इसका क्या दुष्प्रभाव पड़ सकता है जिस जगह डंप किया जा रहा है क्या उसके आस पास कोई नदी नाला या झील तो नही जिससे की उसका कोई दुष्प्रभाव तो नही होगा आगे चलकर ।
जब इस अवैध फ्लाई ऐश डंपिंग की जानकारी मीडिया ने घरघोड़ा एसडीएम रमेश मोरे से लेना चाह तो उनके द्वारा बताया गया कि उन्हें इस बारे में किसी प्रकार की जानकारी नहीं है।
मुझे आपके माध्यम से पता चल रहा है तत्काल अनु विभागीय अधिकारी व तहसीलदार विकास जिंदल मौके पर पहुंच हल्का पटवारी वीरेंद्र ठाकुर और आरआई को जमीन का सीमांकन करने का आदेश दिया। और ट्रांसपोर्टिंग को तत्काल बंद करवाया गया। सीमांकन के दौरान यह पाया गया किसान बंसी राम पिता मुनू राम द्वारा 3 एकड़ अपने निजी भूमि में डालने का अनुमति दिया गया था परंतु टीआरएन एनर्जी द्वारा बिना अनुमति 80 डिसमिल राजस्व भूमि पर अवैध रूप से फ्लाई एस ड्रम किया गया है।
अनुविभागी अधिकारी रमेश मोर ने बताया जांच प्रतिवेदन बना पर्यावरण विभाग और कलेक्टर सर को भेज दिया गया है।

अब सवाल यह उठता है जहां एक और जिलाधीश कार्तिकेय गोयल पर्यावरण की सुरक्षा को लेकर सक्रिय और गंभीर नजर आते हैं तो आखिर इतने दिन भी जाने पर अभी तक टी आरएन एनर्जी पर कार्यवाही की गाज क्यों नहीं गिरी। और पर्यावरण विभाग भी आखिर मौन क्यों ?

दीपक साहू

संपादक

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