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इस राज्य में शुरू हुआ भारत का पहला ऑनलाइन कोर्ट, 24 घंटे होगी सुनवाई

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: भारत का पहला ऑनलाइन कोर्ट केरल के कोल्लम में शुरू हुआ है. देश के पहले ऑनलाइन कोर्ट ने काम करना भी शुरू कर दिया है. ये कोर्ट 24 घंटे चलेगा. इसमें इस महीने की 20 तारीख से मामलों पर सुनवाई होनी भी शुरू हो गयी है. इस कोर्ट में एक मजिस्ट्रेट और तीन कर्मचारी पदस्थ हैं.

कोर्ट की सबसे बड़ी खासियत यही है कि इसमें 24 घंटे सुनवाई होगी. कोर्ट में केस कहीं से भी ऑनलाइन दाखिल किए जा सकते हैं. कोर्ट की वेबसाइट पर निर्धारित प्रपत्र भरकर केस ऑनलाइन दाखिल करना होगा. कोर्ट के कामकाज को लेकर सोमवार को कोल्लम बार एसोसिएशन हॉल में वकीलों और क्लर्कों को ट्रेनिंग दी जाएगी.

कोर्ट बिल्डिंग में जनरल कोर्ट में होने वाली कोई भी एक्टिविटी नहीं होगी, न तो मामला दाखिल करने वाले को और न ही वकीलों को पर्सनली अदालत में पेश होने की जरूरत होगी. मुकदमे की बहस, सुनवाई और फैसले समेत पूरा प्रोसेस ऑनलाइन किया जाएगा. पुलिस स्टेशनों को ऑनलाइन ही पत्र भेजा जाएगा. आरोपी और केस करने वालों दोनों को अर्जी ऑनलाइन ही दाखिल करनी होगी.

बाकी जिलों में भी शुरू करने का प्लान

ऑनलाइन अपलोड किए गए दस्तावेजों का इस्तेमाल करके जमानत ली जा सकती है. कोर्ट में फीस का भुगतान ई-पेमेंट के जरिए करना होगा. यहां मामला दर्ज करने वालों और वकीलों के लिए अदालती कार्रवाई में सीधे भाग लेने के लिए एक प्रोसेस तैयार किया गया है. यह डिजिटल कोर्ट इस महीने की 20 तारीख से कोल्लम जिले की चार अदालतों में इसी तरह के मामलों की सुनवाई करेगा. इस डिजिटल कोर्ट की कार्यप्रणाली को देखकर और जिलों में भी ऐसी अदालतें शुरू करने का प्लान बनाया जा रहा है.

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हाई कोर्ट ऑडिटोरियम में उद्घाटन

ऑनलाइन कोर्ट का उद्घाटन इस साल 17 अगस्त को हाई कोर्ट ऑडिटोरियम में किया गया था. समारोह में मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन भी शामिल हुए थे. कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए न्यायमूर्ति बीआर गवई ने केरल की पहल की सराहना की थी. उन्होंने कहा किया कि सुप्रीम कोर्ट ने देश में कोविड महामारी के दौरान लॉकडाउन में 48 घंटे के अंदर ही ऑनलाइन सुनवाई शुरू कर दी थी. उन्होंने कहा, “इसलिए इस तकनीक से लाखों भारतीय नागरिकों को मदद मिलेगी”

तकनीक कई लोगों की मदद करेगी

उन्होंने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट में संपर्क नहीं कर पाने के कारण किसी को भी न्याय से वंचित नहीं किया जाना चाहिए. हम सभी ने देखा है कि तकनीक का इस्तेमाल करके देश के किसी भी कोने से लोग सुप्रीम कोर्ट में पेश हो सकते हैं. मुझे यकीन है कि यह तकनीक कई लोगों की मदद भी करेगी. इससे हमें सभी के लिए सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय के अपने सपने को हासिल करने में मदद मिलेगी.

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Deepak Sahu

Editor in Chief

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