New Delhi/Swaraj Today: दिल्ली-NCR से मजदूर वर्ग धीरे-धीरे अपने घरों की ओर पलायन कर रहा है. वजह- LPG गैस सिलेंडर. मजदूरों के लिए अब यहां न तो काम बचा है और न ही खाना. गैस इतनी महंगी है कि उसे भराने में दिन की पूरी दिहाड़ी चली जाए.
मीडियाकर्मियों द्वारा पूछे जाने पर छलक उठा मजदूरों का दर्द
रेहड़ी-खोमचा लगाने वाले भी धीरे-धीरे अपना सामान समेट कर घर की ओर निकल रहे हैं. कुछ जो बचे हैं, वो सिलेंडर की लाइन में लगे नजर आते हैं. जब सिलेंडर नहीं मिलता रेलवे स्टेशन पर लाइन में लग जाते हैं, ताकि टिकट कटाकर घर की ओर निकल जाएं. मीडियाकर्मियों ने आनंद विहार टर्मिनल पर दिल्ली-NCR से पलायन कर रहे लोगों से बात की. इस दौरान लोगों ने अपना दर्द बयां किया.
दिल्ली-NCR में LPG गैस की किल्लत और बढ़ती महंगाई ने मजदूर वर्ग की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित किया है. हालात इतने बिगड़ गए हैं कि बड़ी संख्या में मजदूर अब शहर छोड़कर अपने गांवों की ओर पलायन कर रहे हैं. बता दें कि राजधानी दिल्ली और आसपास के इलाकों में रसोई गैस सिलेंडर की कमी की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. कई जगहों पर गैस या तो मिल नहीं रही या फिर ब्लैक मार्केट में ऊंचे दामों पर बेची जा रही है. इसका सीधा असर रोज कमाने-खाने वाले मजदूरों पर पड़ रहा है, जिनकी आमदनी पहले से ही सीमित है.

अपने-अपने गांव को ओर लौट रहे लोग
आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग अपने गांव लौटने के लिए टिकट लेते नजर आए. एक ओर गैस सिलेंडर के लिए लंबी कतारें हैं तो दूसरी ओर रेलवे स्टेशनों पर घर लौटने वालों की भीड़. दोनों की वजह एक ही है- ‘गैस संकट’. पलायन कर रहे मजदूरों का कहना है कि गैस सिलेंडर मिलना मुश्किल हो गया है. अगर मिलता भी है तो कीमत बहुत ज्यादा है. रोज की कमाई से घर चलाना संभव नहीं रहा. ऐसे में उनके सामने दो ही विकल्प बचे हैं- या तो महंगे शहर में संघर्ष करें या फिर गांव लौट जाएं.
हालात सुधरने पर लौटेंगे
मजदूरों ने बताया कि जैसे ही हालात सामान्य होंगे, वे दोबारा काम की तलाश में दिल्ली लौटेंगे, लेकिन फिलहाल यहां रहकर गुजारा करना उनके लिए संभव नहीं है. केंद्र और राज्य सरकारें गैस की पर्याप्त आपूर्ति का दावा कर रही हैं. बावजूद इसके, जमीनी स्तर पर किल्लत और ब्लैक मार्केटिंग की शिकायतें सामने आ रही हैं.
सरकार के लिए बहुत बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों का मानना है कि जमाखोरी और कालाबाजारी ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है. महंगाई, कमाई और जरूरी संसाधनों के बीच बिगड़ता संतुलन मजदूरों को पलायन के लिए मजबूर कर रहा है. अगर जल्द समाधान नहीं निकला तो यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है.
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