लश्कर के डिप्टी कमांडर रिज़वान हनीफ का पूरा परिवार जलकर खाक ! पाक में मचा हड़कम्प, अज्ञात हमलावर पर संदेह, जाँच में जुटी सुरक्षा एजेंसियाँ

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: पाक अधिकृत जम्मू-कश्मीर (POK) और पाकिस्तान में इन दिनों आतंकवादियों के लिए हालात निरंतर मुश्किल में पड़ती नज़र आ रही है। लश्कर-ए-तैयबा के डिप्टी कमांडर रहे रिज़वान हनीफ के घर में संदिग्ध हालत में आग लगने की घटना ने आतंकी संगठनों में ज़बरदस्त हड़कंप पैदा कर दी है।

इस हादसे में रिज़वान के परिवार के कुछ सदस्यों की मौत की खबर सामने आयी है। साथ ही इस आगजनी के पीछे किसी ‘अनजान हमलावर’ का हाथ हो सकता है, हालांकि पाकिस्तानी एजेंसियां अभी तक आग लगने के कारणों की पुष्टि नहीं कर पाई हैं।

कौन है रिज़वान हनीफ लश्कर-ए-तैयबा ?

सुरक्षा सूत्रों के अनुसार, रिज़वान हनीफ लश्कर-ए-तैयबा का एक महत्वपूर्ण चेहरा था और POK में सक्रिय रहते हुए उसका मुख्य काम लश्कर, जैश-ए-मोहम्मद और अन्य आतंकी संगठनों के बीच आपसी तालमेल और कोऑर्डिनेशन बनाए रखना था। इन संगठनों के बीच जिस तरह की ‘यूनिफाइड कमांड’ की बात सामने आती रही है, उसमें रिज़वान की भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण मानी जाती थी। ऐसा दावा है कि पहलगाम आतंकी हमले से भी उसका सीधा या परोक्ष जुड़ाव रहा है और अफगानी आतंकियों की भर्ती व उन्हें भारत भेजने की साजिश में भी उसका पूरा हाथ था।

कैसे लगी रिज़वान के घर में आग?

रिज़वान के घर में आग लगने की घटना से ठीक 2 दिन पहले इस्लामाबाद में 26/11 मुंबई हमले के मास्टरमाइंड डेविड हेडली के एक रिश्तेदार के घर में भी रहस्यमय तरीके से आग लगी थी। उस घटना में भी कई लोगों की मौत की खबरें सामने आई थीं। दोनों घटनाओं के पैटर्न को देखते हुए सुरक्षा विशेषज्ञ इसे सिर्फ संयोग नहीं मान रहे हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तान में सक्रिय ‘अनजान गनमैन’ अब गोलियों के स्थान पर आगजनी को हथियार बना रहे हैं। जानकारों के मुताबिक, यह एक नया ट्रेंड हो सकता है, जिसमें बिना सीधे हमले के टारगेट को ‘खत्म’ किया जा रहा है।

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आतंकवाद के खिलाफ सख्ती

इस बीच जम्मू-कश्मीर में भी आतंकवाद के खिलाफ सख्ती तेजी से बढ़ाई जा रही है। हाल ही में उपराज्यपाल ने आतंकवादियों से सीधे या परोक्ष रूप से जुड़े 5 सरकारी कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इन पर लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिज़्बुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों से संबंध होने के आरोप थे। यह कार्रवाई संविधान के अनुच्छेद 311(2)(C) के अंतर्गत की गई, जिसके तहत जांच प्रक्रिया को दरकिनार कर तत्काल बर्खास्तगी का अधिकार उपराज्यपाल को प्राप्त है।

80 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को सेवा से हटाया

जानकारी के अनुसार, बर्खास्त किए गए कर्मचारियों में एक फॉरेस्ट गार्ड, एक असिस्टेंट लाइनमैन, एक शिक्षक और स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं। इससे पहले भी 80 से ज्यादा सरकारी कर्मचारियों को इसी आधार पर सेवा से हटाया जा चुका है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कोर्ट में ऐसे मामलों को साबित करना हमेशा मुश्किल हो जाता है, क्योंकि गवाह डर के कारण बयान से मुकर जाते हैं। इसी कारण से प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए तत्काल कार्रवाई का रास्ता चुना है।

आतंकियों का ‘अंतिम संस्कार’

सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जम्मू-कश्मीर में हालात सुधरने के पीछे यही सख्ती एक बड़ी वजह है। सरकारी तंत्र के अंदर बैठे आतंक समर्थकों पर कार्रवाई, आतंकियों को शरण देने वालों की संपत्ति जब्ती और NIA व राज्य जांच एजेंसी (SIA) की सक्रिय भूमिका ने आतंकवाद की कमर तोड़ने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। कुल मिलाकर, चाहे POK में संदिग्ध आगजनी की घटनाएं हों या जम्मू-कश्मीर में प्रशासनिक सख्ती, आतंकियों के लिए यह दौर ‘अंतिम संस्कार’ जैसा साबित होता नज़र आ रहा है।

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दीपक साहू

संपादक

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