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    Home»Featured»बिलासपुर के पत्रकारों ने आईजी और कलेक्टर से की मुलाक़ात, दो पत्रकारों पर बिना जांच दर्ज हुई एफआईआर का किया विरोध
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    बिलासपुर के पत्रकारों ने आईजी और कलेक्टर से की मुलाक़ात, दो पत्रकारों पर बिना जांच दर्ज हुई एफआईआर का किया विरोध

    Deepak SahuBy Deepak SahuJune 12, 2026
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    *बिलासपुर के पत्रकारो ने आईजी और कलेक्टर से मांग की पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक 2023 का पुलिस परिपालन करें ऐसा दिशा निर्देश जारी किया जाये*.

    *पत्रकारों पर हुई एफ आई आर पर गिरफ्तारी की रोक जब तक जांच पूरी नहीं हों जाती*.

    *बिलासपुर आई जी रामगोपाल गर्ग जी एवं कलेक्टर संजय अग्रवाल जी ने आश्वासन दिया पत्रकारों के साथ अन्याय नहीं होने दिया जायेगा*

    बिलासपुर /स्वराज टुडे: बिलासपुर के पत्रकार साथियों ने विगत दिनों दो पत्रकारों पर हुई बिना जांच के एफ आई आर का विरोध दर्ज कराने एवं बिलासपुर में पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक 2023 का परिपालन हों और पुलीसिया कार्यवाही जो बिना जांच पत्रकार पर एफ आई आर कर दी जा रही उसके विरोध में आई जी रामगोपाल गर्ग जी एवं बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल जी से मुलाकात की और अपनी बात रखी.
    पत्रकारों ने अपनी बात रखते हुये दोनों अधिकारीयों को ज्ञापन सौपा ज्ञापन में कहा की बिलासपुर जिले में हाल ही में पत्रकारों के विरुद्ध की गई पुलिस कार्रवाई से पत्रकार समुदाय में गहरा असंतोष, भय एवं असुरक्षा का वातावरण निर्मित हो गया है। पत्रकार समुदाय का मानना है कि शासन द्वारा निर्धारित पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक 2023 का संबंधी प्रावधानों एवं जांच प्रक्रिया का पालन किए बिना पत्रकारों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है, जिससे स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पत्रकारिता प्रभावित होने की आशंका उत्पन्न हो गई है।
    ज्ञातव्य है कि सिविल लाइन थाना, बिलासपुर के पुराने भवन के एक कमरे का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ था। उक्त वीडियो में सिविल लाइन थाना में पदस्थ आरक्षक मनोज साहू वर्दी पहने हुए जमीन पर सोता हुआ दिखाई दे रहा है तथा एक अन्य कमरे में बीयर एवं शराब की बोतलें रखी हुई दिखाई दे रही हैं। यह वीडियो लगभग तीन माह पुराना बताया गया है।
    उक्त वीडियो के आधार पर समाचार सीजी भास्कर सहित अनेक समाचार पोर्टलों एवं मीडिया संस्थानों द्वारा प्रकाशित किया गया। समाचार प्रकाशन के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) का पक्ष भी प्रमुखता से प्रकाशित किया गया, जिसमें उनके द्वारा मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई किए जाने की बात कही गई थी। अर्थात समाचार प्रकाशन में पुलिस प्रशासन का पक्ष भी सम्मिलित किया गया था।
    इसके दो दिन बाद सिविल लाइन थाना में पदस्थ आरक्षक मनोज साहू एवं चाय दुकान संचालक सोनू सिंह के बीच कथित बातचीत का एक ऑडियो सोशल मीडिया में वायरल हुआ। उक्त ऑडियो में सोनू सिंह द्वारा यह कहते हुए सुना जा रहा है कि वीडियो को सार्वजनिक नहीं करने के एवज में पत्रकार लोग एक लाख रुपये की मांग कर रहे हैं तथा राशि नहीं देने पर संबंधित आरक्षक की पदोन्नति प्रभावित हो सकती है। बातचीत में यह भी कहा गया कि वीडियो पत्रकार अनुज श्रीवास्तव के पास है। वहीं आरक्षक मनोज साहू द्वारा बातचीत के दौरान पत्रकार जिया खान का भी नाम लिया गया।
    उक्त ऑडियो के आधार पर आरक्षक मनोज साहू की रिपोर्ट पर सिविल लाइन पुलिस द्वारा आरक्षक रितेश मिश्रा, पत्रकार जिया खान, पत्रकार अनुज श्रीवास्तव एवं चाय दुकान संचालक सोनू सिंह के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर ली गई।

    यह भी पढ़ें :  जेल में निरुद्ध श्रद्धा दुबे को लेकर मॉडल ने किया सनसनीखेज खुलासा, एक बड़े अधिकारी के साथ रात बिताने को डाला था दबाव, इनकार करने पर की हैवानियत

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    पत्रकार समुदाय का कहना है कि एफआईआर दर्ज करने से पूर्व न तो पत्रकार जिया खान एवं पत्रकार अनुज श्रीवास्तव का बयान दर्ज किया गया, न ही उनका पक्ष लिया गया। इसके अतिरिक्त कथित धन मांगने अथवा लेनदेन से संबंधित किसी स्वतंत्र साक्ष्य, ऑडियो, वीडियो, दस्तावेज अथवा अन्य प्रमाण की निष्पक्ष जांच किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। मामले में विस्तृत जांच किए बिना सीधे एफआईआर दर्ज किया जाना प्राकृतिक न्याय एवं निष्पक्ष जांच के सिद्धांतों के विपरीत प्रतीत होता है।
    सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पत्रकारों की सुरक्षा एवं स्वतंत्र पत्रकारिता सुनिश्चित करने हेतु पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक 2023 का संबंधी व्यवस्था लागू की गई है। इस संबंध में पुलिस मुख्यालय, छत्तीसगढ़ द्वारा दिनांक 31.01.2006 को समस्त रेंज आईजी एवं पुलिस अधीक्षकों को पत्र जारी किया गया था। इसके अतिरिक्त गृह विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा दिनांक 04.02.2016 को भी समस्त रेंज आईजी को परिपत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिए गए थे कि पत्रकारों के विरुद्ध प्राप्त शिकायतों पर पहले जांच की जाएगी तथा जांच के उपरांत ही एफआईआर दर्ज करने जैसी कार्रवाई की जाएगी।
    उक्त निर्देशों के अनुसार पत्रकारों से संबंधित शिकायतों की जांच हेतु एक समिति गठित की जानी है, जिसमें—
    • एक पुलिस अधिकारी सदस्य होगा।• जनसंपर्क विभाग का प्रमुख पदेन सदस्य होगा।• तीन वरिष्ठ पत्रकार सदस्य होंगे, जिनमें कम से कम एक महिला पत्रकार शामिल होगी।• समिति में शामिल पत्रकारों को न्यूनतम 12 वर्ष का पत्रकारिता अनुभव होना आवश्यक होगा।
    दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि पत्रकार जिया खान एवं पत्रकार अनुज श्रीवास्तव के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने से पूर्व उक्त प्रावधानों के अनुरूप किसी समिति द्वारा जांच कराए जाने की जानकारी उपलब्ध नहीं है। यदि ऐसी कोई जांच हुई है तो उसकी रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है।
    इस प्रकार शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना पत्रकारों के विरुद्ध आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जाने से पूरे पत्रकार समुदाय में यह संदेश जा रहा है कि किसी भी समाचार के प्रकाशन के बाद बिना पूर्व जांच के सीधे एफआईआर दर्ज की जा सकती है। इससे पत्रकारों में निष्पक्ष, निर्भीक एवं जनहित से जुड़े समाचारों के प्रकाशन को लेकर भय का वातावरण निर्मित हो रहा है, जो लोकतंत्र, प्रेस की स्वतंत्रता एवं संविधान प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के लिए उचित नहीं है।
    अतः पत्रकार समुदाय निम्नलिखित मांगें करता है—
    3. पत्रकार जिया खान एवं पत्रकार अनुज श्रीवास्तव के विरुद्ध दर्ज प्रकरण को शासन द्वारा निर्धारित समिति को सौंपते हुए तीन दिवस के भीतर निष्पक्ष जांच कराई जाए।
    4. समिति द्वारा प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाए ताकि समस्त तथ्य जनता एवं पत्रकार समुदाय के समक्ष स्पष्ट हो सकें।
    5. यह स्पष्ट किया जाए कि उक्त प्रकरण में पत्रकार सुरक्षा संबंधी शासन निर्देशों, पुलिस मुख्यालय के 31.01.2006 के पत्र तथा गृह विभाग के 04.02.2016 के परिपत्र का पालन क्यों नहीं किया गया।
    6. भविष्य में किसी भी पत्रकार के विरुद्ध समाचार प्रकाशन, कथित धमकी, वसूली अथवा अन्य किसी प्रकार की शिकायत प्राप्त होने पर पहले शासन द्वारा निर्धारित समिति से जांच कराई जाए तथा जांच में आरोपों की पुष्टि होने के बाद ही एफआईआर दर्ज की जाए।
    7. बिलासपुर जिले में पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों एवं समिति की वर्तमान स्थिति की जानकारी सार्वजनिक की जाए तथा उनके प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित किया जाए।
    8. पत्रकारों के संवैधानिक अधिकारों, प्रेस की स्वतंत्रता तथा निष्पक्ष पत्रकारिता की सुरक्षा हेतु आवश्यक निर्देश जारी किए जाएं।
    पत्रकार समुदाय स्पष्ट करना चाहता है कि वह किसी भी दोषी व्यक्ति को संरक्षण देने के पक्ष में नहीं है। यदि किसी पत्रकार द्वारा कोई अवैधानिक कार्य किया गया है तो निष्पक्ष जांच उपरांत कानून के अनुसार कार्रवाई अवश्य की जाए। किन्तु पत्रकारों के विरुद्ध कार्रवाई करते समय शासन द्वारा निर्धारित प्रक्रिया एवं पत्रकार सुरक्षा कानून विधेयक 2023 संबंधी प्रावधानों का पालन किया जाना भी उतना ही आवश्यक है।
    यदि इस ज्ञापन के प्रस्तुत होने के तीन दिवस के भीतर पत्रकार जिया खान एवं पत्रकार अनुज श्रीवास्तव के प्रकरण की शासन द्वारा निर्धारित समिति से जांच प्रारंभ नहीं की जाती, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की जाती तथा बिलासपुर जिले में पत्रकार सुरक्षा संबंधी प्रावधानों के पालन को सुनिश्चित नहीं किया जाता, तो पत्रकार समुदाय 15 जून 2026 से चरणबद्ध लोकतांत्रिक आंदोलन प्रारंभ करने के लिए बाध्य होगा। आंदोलन के अंतर्गत शांति पूर्ण धरना, प्रदर्शन, ज्ञापन, जनजागरण अभियान तथा अन्य लोकतांत्रिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इससे उत्पन्न होने वाली समस्त परिस्थितियों की जिम्मेदारी शासन, जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन की होगी।
    अतः आपसे अनुरोध है कि प्रकरण की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित कर पत्रकारों में व्याप्त भय एवं असुरक्षा की भावना को दूर करने हेतु तत्काल आवश्यक कार्रवाई करने का कष्ट करें।

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