Korba news: खनिज विभाग के जांच नाकों पर महिने में लाखों की अवैध वसूली, रिटायर्ड कर्मचारी कांटों पर कर रहे ड्यूटी !

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छत्तीसगढ़
कोरबा/स्वराज टुडे: खनिज विभाग जो भारत में केंद्र और राज्य स्तर पर खनिज संसाधनों के प्रबंधन, विकास और विनियमन के लिए जिम्मेदार होता है, इनके कार्यों में ,खनिजों का अन्वेषण और सर्वेक्षण , खनन की रोकथाम — अवैध खनन, परिवहन और व्यापार पर नजर रखना, छापेमारी, जुर्माना और जब्ती जैसे प्रवर्तन कार्य करना।

खनिज राजस्व का संग्रह और प्रबंधन 

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रॉयल्टी, डेड रेंट, प्रीमियम, DMF फंड आदि का संग्रह और उपयोग किन्तु छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में खनिज जांच कांटे बंद पड़े हैं जिसमें ना ही वाहनों को चढ़ाया जाता है, और ना ही तौल किया जाता है।

अब सवाल उठता है कि फिर खनिज विभाग की खनिज नांके केवल कागजों में सील लगाकर 20, 50, और 100 रुपये की वसूली कर रहें हैं,आप देख सकते हैं कि सभी वाहन दूर से ही बिना कांटों में चढ़े केवल सील लगाकर चली जाती है, अब कोई ओवरलोड हो तब भी पकड़ा नहीं जा सकता है, क्योंकि कांटे काम ही नहीं कर रहे हैं। क्या शासन कई सालों से बंद पड़ी इन खनिज कांटों को नहीं बनवा सकती या इसके पीछे भी कोई राज़ है। आगे वीडियो में अवैध रूप से रूपये लेने के और तो और रिटायर्ड कर्मचारी और खाना पकाने वाले नजर आएंगे।

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वीडियो में आप देख सकते हैं कि खुल्ले आम रुपये की वसूली हो रही है। ये सिर्फ खनिज जांच कांटों का हाल है, जिसमें हमनें आपको कटघोरा, पाली और हरदीबाजार के कांटों पर हो रहे अवैध वसूली की फूटेज दिखाई है । गौर करने वाली बात यह है कि कटघोरा के वीडियो में नज़र आने वाले नरेंद्र वर्मा जी रिटायर्ड हैं । इन्हें किनके कहने पर काम लिया जा रहा है, हमने इनकी सूचना खनिज अधिकारी राकेश वर्मा जी को दी थी , पर उनके द्वारा भी कुछ नहीं किया गया।

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ऐसे ही पाली की विडियो में रिटायर्ड धरमपाल जी नज़र आ रहे हैं, हमने पहले भी ऐसी खबर दिखाई थी पर खनिज विभाग ने उसपर कोई कार्यवाही नहीं की थी। इससे खनिज विभाग की कार्यशैली भी संदेहास्पद है। इनके जो बदली करने के तरीके हैं, वैसे ही खनिज नाके के प्रभारी और सैनिक बदले जाते हैं, किन्तु इनपर कोई कार्यवाही नहीं की जाती। इनकी वसूली को गौर करें तो सैंकड़ों की संख्या में ट्रकें जो कोयला परिवहन करते हैं, हरदीबाजार में लगभग 600 से 700 वाहने गुज़रती है, ऐसे ही पाली में तो 20 रुपये के हिसाब से 700×20 के हिसाब से 14000 रुपये एक दिन की वसूली और लगभग 100 रूपये के हिसाब से 50 गिट्टी वाली गाड़ियों का ही माने तो 5000 रुपये एक दिन के तो समझिए कि लगभग एक दिन की अवैध वसूली 19000 रुपये होती है अब इसे 30 दिन में गुंणा करें तो पांच लाख सत्रर हजार रुपये एक कांटे से महिने की वसूली की जा रही है।

आखिर किसके इशारे पर हो रही अवैध वसूली

 

ऐसे ही सभी कांटों में आगे-पीछे कुछ आंकड़े हो सकते हैं, परंतु छोटी-छोटी नज़र आने वाली यह राशि दस -पंद्रह लाख से अधिक की अवैध वसूली है। अब यह किसके इशारे पर हो रहा है और कौन-कौन इसमें शामिल हैं यह भी जांच का विषय है। क्या इसपर शासन कोई बड़ी कार्यवाही करेगा या इसे अनदेखा करके ऐसे भ्रष्टाचार को बढ़ावा देगा ये देखने वाली बात है।

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दीपक साहू

संपादक

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