सांसद हों या मंत्री…15 रुपए में खाते हैं 1 बिस्कुट, पैसा देते वक्त लगता है 440 वोल्ट का झटका, कैंटीन में ऊंची कीमतों पर मचा विवाद

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: लोकसभा 2024 के चुनाव जीतकर आए नवनिर्वाचित सांसदों को उनके सरकारी आवास मिलने तक दिल्ली के जनपथ स्थित वेस्टर्न कोर्ट में ठहराया गया है। यहां पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कैबिनेट के कई मंत्री भी ठहरे हुए हैं।

हालांकि, इन सांसदों और मंत्रियों के समर्थकों को कैंटीन के रेट चार्ट, खासकर चाय और कॉफी के दाम को लेकर काफी हैरानी हो रही है। वेस्टर्न कोर्ट एनेक्सी कैंटीन में आने वाला हर दूसरा शख्स काउंटर पर तैनात कर्मचारी से बहस करता हुआ नजर आता है। इसका मुख्य कारण कॉफी के साथ बिस्कुट का चार्ज है। जब कोई कॉफी मांगता है, तो उसके साथ दो गुड डे बिस्कुट भी दे दिए जाते हैं।

इससे समर्थक तब हैरान हो जाते हैं जब उन्हें दो बिस्कुट का दाम 30 रुपये और कॉफी का चार्ज 20 रुपये मिलाकर 50 रुपये का बिल थमा दिया जाता है। बीजेपी की टिकट पर मंडी लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर आईं कंगना राणावत के राजनीतिक सलाहकार मयंक मधुर ने इस विषय पर बात करते हुए कहा कि, “मैं अपने मित्र अनुज अग्रवाल के साथ कैंटीन में कॉफी पीने गया। मैंने दो कॉफी का ऑर्डर दिया और काउंटर पर मौजूद मैनेजर ने 100 रुपये का बिल थमा दिया। मैंने 100 रुपये यह सोचकर दे दिए कि एक कॉफी का रेट 50 रुपये होगा।

लेकिन, जब मैं सीट पर बैठा तो कॉफी के साथ दो गुड डे बिस्कुट भी मिले। मैंने सर्व करने वाले वेटर से कहा कि मैंने बिस्कुट नहीं मांगे फिर दो बिस्कुट क्यों दिए गए? इस पर वेटर ने कहा कि सर, यह आपको पहले ही बताना चाहिए था।” मधुर ने जब बिल देखा तो उसमें लिखा था, “कॉफी विद बिस्कुट्स 95.24 रुपये और साथ में जीएसटी 4.76 रुपये”। उन्होंने स्टॉफ से पूछा कि क्या बिल में बिस्कुट के भी पैसे जोड़े गए हैं।

स्टॉफ ने बताया कि दो गुड डे बिस्कुट के दाम 30 रुपये भी इसमें शामिल हैं। मधुर ने कहा कि उन्होंने बिस्कुट का ऑर्डर नहीं दिया, फिर भी उन्हें यह चार्ज क्यों किया गया। यह समस्या केवल मधुर और हिमांशु के साथ ही नहीं, बल्कि अन्य कई लोगों के साथ भी होती है। कई लोग बिना ध्यान दिए 50 रुपये या 100 रुपये दे देते हैं, यह सोचकर कि कॉफी का रेट यही होगा।

जबकि वास्तव में कॉफी का रेट वहां 20 रुपये लिखा हुआ है। फतेहपुर सिकरी से जीतकर आए सपा सांसद के एक समर्थक ने भी इसी मुद्दे पर विवाद किया। बिहार के पूर्णिया से जीतकर आए निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के एक समर्थक के साथ भी ऐसा ही हुआ। कैंटीन स्टॉफ के मुताबिक विशेष परिस्थितियों में रूम तक चाय-पानी, नाश्ता और खाना पहुंचाया जा सकता है।

ऐसे में सांसद पैसा नहीं देते, उनके साथ आए समर्थक ही बार-बार गेस्ट के लिए चाय और कॉफी पिलाते हैं और हर बार 30 रुपये बिस्कुट के अतिरिक्त चार्ज देने पड़ते हैं। इससे समर्थकों को बार-बार आर्थिक झटका लगता है। इस मामले को लेकर कैंटीन प्रबंधन से जल्द ही कुछ सुलझाव की उम्मीद की जा रही है ताकि सांसदों और उनके समर्थकों को इस तरह की समस्याओं का सामना न करना पड़े।

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दीपक साहू

संपादक

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