मोदी सरकार के नेतृत्व में बदल गई भारतीय रेलवे की तस्वीर, लेकिन आम यात्रियों का हाल बेहाल

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: बीते 10 वर्षों में मोदी सरकार ने भारतीय रेलवे की तस्वीर को बदल दिया है। आज के समय में रेल से सफर करने वाले मीडिल क्लास लोगों को भी एयरपोर्ट जैसी शानदार और बेहतरीन सुविधाएं उपलब्ध हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में ही आज एक साधारण और आम व्यक्ति को मॉडर्न रेल सुविधाओं का लाभ मिल रहा है। मोदी सरकार के नेतृत्व में आज भारतीय रेलवे आधुनिकता की नई गाथा लिख रहा है।

देश में कई नई ट्रेनें चली हैं, जिसमें वंदे भारत, अमृत भारत और नमो भारत जैसी कई अत्याधुनिक ट्रेनों की शुरुआत हुई है, जिनके चलने से यात्रियों को बेहद अनूठे एक्सपीरियंस का लाभ उठाने को मिला है। आज के समय में ये सेमी हाईस्पीड ट्रेनें नए भारत की तस्वीर बना रही है। नए भारत की पहचान अब ये ट्रेनें बन चुकी है। वर्ष 2014 में मोदी सरकार के आने के बाद से भारतीय रेलवे ने शानदार प्रगति की है, जिसपर नजर डालते है।

बीते 10 वर्षों के दौरान 26 हजार किलोमीटर की नई रेलवे लाइनें बिछाई गई है। इसके साथ ही 40 हजार किलोमीटर से अधिक रेलवे लाइनों का विद्युतीकरण किया गया है। 1220 किलोमीटर लंबे फ्रेट कॉरिडोर का निर्माण भी इस दौरान किया गया है। जम्मू कश्मीर में चेनाब नदी पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे ब्रिज भी बना है। 1300 से अधिक रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प भी इस दौरान किया जा रहा है। आज के समय में देश में 100 से भी अधिक वंदे भारत ट्रेनें दौड़ रही है। अब भारत में नमो भारत और अमृत भारत ट्रेनों जैसी नई और लेटेस्ट टेक्नोलॉजी युक्त ट्रेनों का परिचालन सफलतापूर्वक किया जा रहा है।

देश भर में वन स्टेशन वन प्रोडक्ट के कुल 1500 स्टॉल भी खोले गए है। इन स्टॉलों की मदद से हजारों छोटे कारिगरों, शिल्पकारों समेत अन्य विश्वकर्मा समुदाय के साथियों को लाभ मिल रहा है। आज के समय में भारत में अत्याधुनिक रेलवे कोच का निर्माण भी हो रहा है। देश में बने लोकोमोटिव, रेलवे कोच श्रीलंका, मोजैम्बिक, सेनेगल, म्यांमार, सूडान जैसे देशों में निर्यात हो रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से रेलवे ने ना सिर्फ नई ऊंचाइयों को छुआ है बल्कि यात्रियों को भी अव्वल दर्जे की सुविधाएं दी है। सत्ता में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद से रेलवे बजट में भी इजाफा हुआ है। वर्ष 2014 में जो रेलवे बजट 65,445 करोड़ रुपये था वो अब 2024 में बढ़कर दो लाख 55 हजार करोड़ रुपये हो गया है। इस शानदार बजट के कारण ही रेलवे का विकास भी तेज गति से हो रहा है। ये बीते 10 वर्षों के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लिए गए सकारात्मक कदमों और मजबूत फैसलों का ही नतीजा है कि आज के समय में भारतीय रेलवे लगातार नए कीर्तिमान गढ़ता जा रहा है। बीते 10 वर्षों में रेलवे में अभूतपूर्व बदलाव हुए है, जिसका साक्षी पूरा देश और जनत रही है, जो आज के समय में सुविधाओं युक्त रेलवे का लाभ उठा रही है।

आम यात्रियों की भी सुन लो मोदी जी

मोदी के शासनकाल में अगर रेलवे ने अनेक उपलब्धियां हासिल की है तो वहीं आम यात्रियों के लिए रेल यात्रा आसान नहीं रह गया है । दरअसल अधिकांश एक्सप्रेस ट्रेनों में जनरल डिब्बों की संख्या को घटा दिया गया है । इसके चलते बचे खुचे जनरल डिब्बों में भेड़ बकरियों की तरह ठूस कर लोगों को यात्रा करनी पड़ती है। समस्या सिर्फ जनरल डिब्बों में ही नही है बल्कि स्लीपर में आरक्षण को लेकर भी है । अगर आप कहीं जाने के लिए अपना रिजर्वेशन करवाते हैं तो आपको कभी भी कंफर्म टिकट नहीं मिलता । कंफर्म टिकट लेने के लिए आपको दो-तीन महीना पहले ही रिजर्वेशन के लिए आवेदन देना पड़ता है।

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दूसरी खास बात यह भी है कि रिजर्वेशन करवाने के बावजूद यात्रा दिवस तक भी आपका टिकट कंफर्म नहीं हो पता । कभी वेटिंग तो कभी RAC में ही यात्रा करना मजबूरी बन जाती है। ऐसी स्थिति में स्लीपर डिब्बों में भी यात्रियों के लिए पैर रखने की जगह नहीं होती वहीं जिन यात्रियों का कंफर्म टिकट होता है उन्हें भारी भी सुविधाओं का सामना करना पड़ता है । अन्य यात्रियों से विवाद और लड़ाई झगड़े की नौबत आ जाती है । कभी-कभी तो AC डिब्बों में भी बगैर टिकट के यात्री घुस जाते हैं जिससे अन्य यात्रियों की सुरक्षा दांव पर लग जाती है।

रही बात ट्रेनों की समय सारिणी की तो ऐसा प्रतीत होता है कि भारत में सही समय पर ट्रेनों को चलाना भगवान ब्रह्मा के हाथों में भी नहीं है । अगर राइट टाइम पर ट्रेन आ जाए तो इसे चमत्कार ही कहा जा सकता है ।

नरेंद्र मोदी की सरकार को देशवासियों को बुलेट ट्रेन का सपना दिखाने के बजाय वर्तमान में चल रहे ट्रेनों में सुविधाओं को बढ़ाने पर ध्यान देना ज्यादा उचित होगा । India Brand Equity Foundation के अनुसार, देश में कुल 22,593 ट्रेनें हैं। इनमें से 9141 माल ढुलाई और 13,452 यात्री ट्रेनें हैं। भारत में हर रोज करीब 2 करोड़ 40 लाख लोग रेलवे से सफर करते हैं। लिहाजा यात्री ट्रेनों की संख्या बढ़ाए जाने की बहुत ज्यादा जरूरत है इसके अलावा जो ट्रेनें चल रही है उनमें स्लीपर और जनरल डिब्बों की संख्या भी बढ़ाया जाना चाहिए । तभी सही मायने में देश की जनता कहेगी कि रेल मंत्रालय ने विकास किया है। वहीं गोदी मीडिया सरकार की जी हुजूरी बंदकर रेल यात्रियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाएं और उसका समाधान करने में अपना सहयोग दें तभी लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की सार्थकता साबित होगी ।

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दीपक साहू

संपादक

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