बिलासपुर में जल्द मिलेगी कैंसर के इलाज की सुविधा, विशाखापट्टनम अपोलो की टीम करेगी यहां के डॉक्टरों को प्रशिक्षित

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छत्तीसगढ़
बिलासपुर/स्वराज टुडे: बिलासपुर में कैंसर, थैलेसीमिया और सिकलसेल जैसी गंभीर बीमारियों के इलाज की सुविधा जल्द ही शुरु होने जा रही है. विशाखापट्टनम अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों का दल जल्द ही यहां के डॉक्टरों को इसके लिए एक्सपर्ट बनाएगा. कैंसर जैसी बीमारियों की तकनीकी जानकारी देने के साथ साथ बोन मैरो ट्रांसप्लांट की भी सुविधा शहर में मुहैया कराएगा.

बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा जल्द ही संस्कारधानी बिलासपुर में भी शुरु होगी. बोन मैरो ट्रांसप्लांट की सुविधा शुरु करने को लेकर विशाखापट्टनम के अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों का एक प्रतिनिधिमंडल बिलासपुर पहुंचा. शहर के बिलासपुर अस्पताल के साथ मिलकर अब डॉक्टर जल्द बोन मैरो जैसी जटिल बीमारियों का इलाज यहीं कर सकेंगे. पहले चरण में जिन लोगों को इलाज की जरूरत होगी उसे एक्सपर्ट डॉक्टरों की निगरानी में विशाखापट्टनम ले जाया जाएगा. जरूरत पड़ने पर मरीज को सर्जरी या ट्रांसप्लांट की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी. बिलासपुर के डॉक्टर विशाखापट्टनम के डॉक्टरों के साथ मिलकर इस गंभीर बीमारी का इलाज करना सीखेंगे, बोन मैरो को कैसे ट्रांसप्लांट किया जाता है वो भी जानेंगे.

कैंसर का भी होगा इलाज

बोन मैरो की बीमारी का इलाज काफी महंगा और मुश्किल होता है. इस गंभीर बीमारी से पीड़ित मरीज को इलाज के लिए या तो मुंबई या फिर दक्षिण भारत के शहरों में ले जाकर किया जाता है. अब जल्द ही इस गंभीर बीमारी का इलाज बिलासपुर शहर में हो सकेगा. गंभीर बीमारियों का इलाज शुरु होने से मरीजों को दूसरे राज्यों में जाना नही पड़ेगा बल्कि उनके इलाज का खर्च भी यहां कम लगेगा.

7 से 15 लाख तक का आएगा खर्च 

विशाखापट्टनम से आए सीनियर कन्सलटेंट डॉ राकेश रेड्डी बोया ने कहा, बोन मैरो, थैेलेसीमिया, सिकलसेल जैसी बीमारियां रेयर हैं. ग्रामीण इलाकों में कई बार बच्चों और बड़ों को ये बीमारी हो जाती हैं. बोन मैरो की समस्या के चलते कैंसर जैसी घातक बीमारी भी लग जाती है. अब इस घातक बीमारी की इलाज जल्द ही बिलासपुर के अपोलो अस्पताल में होगा. डॉक्टरों के मुताबिक छोटे बच्चों में इलाज करने पर सक्सेस रेट काफी ज्यादा होता है बुजुर्गों के मुकाबले. बिलासपुर में इलाज की सुविधा शुरू होने के बाद 7 से 15 लाख तक के खर्च में रोगी को पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है

 

दीपक साहू

संपादक

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