बाबा सूरजपाल के करीबी मधुकर ने पुलिस के समक्ष उगले कई बड़े राज, सामने आया सत्संग से जुड़ा चौंकाने वाला खुलासा

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उत्तरप्रदेश
हाथरस/स्वराज टुडे: उत्तर प्रदेश के हाथरस में 2 जुलाई को हो रहे सत्संग में मची भगदड़ में 121 लोगों की मौत ने पूरे प्रदेश को हिला कर रख दिया है. इस घटना की चर्चा हर कहीं हो रही है. तो वहीं पुलिस लगातार इस घटना को लेकर जांच कर रही है.
इसी क्रम में पुलिस ने बाबा सूरजपाल उर्फ नारायण साकार हरि के करीबी व कार्यक्रम आयोजक मुख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर को गिरफ्तार कर लिया है और अब पूछताछ जारी है और कई राजनीतिक दलों से उसके गहरे रिश्ते भी सामने आए हैं.

पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि मधुकर के सम्बंध कई बडे़ नेताओं से हैं. पूछताछ में उसने बताया कि सत्संग आयोजन के लिए वह फंड इकट्ठा करने का काम करता था. यही नहीं सभी बड़े आयोजनों की जिम्मेदारी भी उसके पास ही रहती थी. तो वहीं जिस समिति के तहत सत्संग का आयोजन होता था उसके सदस्य उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, बिहार और छत्तीसगढ़ में बताए जा रहे हैं.

10 साल पहले जुड़ा था बाबा से

हादसे के मामले में गिरफ्तार मु्ख्य आरोपी देवप्रकाश मधुकर रहने वाला तो एटा का है लेकिन कई सालों से वह सिकंदराराऊ के मोहल्ला दमदपुरा नई कॉलोनी में रह रहा था. बताया जा रहा है कि वह 10 साल पहले बाबा सूरजपाल से मिला था और फिर बाबा की मानव मंगल मिलन सद्भावना समागम समिति से जुड़ गया था. इसी के बाद धीरे-धीरे बाबा का उस पर भरोसा बढ़ता गया. कहा जाता है कि बाबा किसी से भी फोन पर बात नहीं करता लेकिन मधुकर से बात होती है. तो वहीं ये भी कहा जा रहा है कि बाबा के जाने के बाद भगदड़ में हुई मौत की खबर भी उसी ने बाबा को दी थी. फिलहाल पुलिस ने इस सवाल के जवाब में कॉल डिटेल खंगालने की बात कही है और इसी के बाद सही बात सामने आने के लिए कहा है.

हाथरस एसपी ने दी ये जानकारी

हाथरस एसपी निपुण अग्रवाल ने मीडिया को बताया कि मधुकर से पूछताछ में सामने आया है कि कई राजनीतिक पार्टियां उसके संपर्क में थीं. फंड इकट्ठा करने के संबंध में गहराई से जांच की जा रही है. उन्होने ये भी बताया कि पूछताछ में ऐसा भी प्रतीत हुआ है कि राजनीतिक दल अपने राजनीतिक और निजी स्वार्थ के लिए इनसे जुड़े हैं. देवप्रकाश मधुकर के सभी बैंक खाते और संपत्ति की जांच की जा रही है. इसके लिए संबंधित एजेंसियों का भी सहयोग लिया जाएगा.

प्रिय शिष्यों में होती है गिनती

कहा जा रहा है कि बाबा सूरजपाल के प्रिय शिष्यो में मधुकर की गिनती होती है. कुछ ही समय में उसे मुख्य सेवादार का दर्जा भी दे दिया गया था. हाथरस में सत्संग कराने की जिम्मेदारी भी उसी को मिली थी और उसी ने एसडीएम सिंकदराराऊ से सत्संग की अनुमति ली थी और सत्संग को लेकर बड़ी पब्लिसिटी की व शहर भर में 50 से अधिक बाबा के होर्डिंग्स और फ्लैक्स लगाए गए थे और बड़े पैमाने में सत्संग को लेकर चंदा इकठ्ठा किया गया था.

कई सियासी दलों के लोग भी बाबा को देते हैं फंड

पूछताछ में ये भी जानकारी सामने आई है कि कई सियासी दलों के लोग भी मधुकर के संपर्क में थे और फंडिंग करते थे. पुलिस को ये भी पता चला है कि इस सत्संग के लिए भी खूब फंडिंग हुई थी. तो वहीं सिंकदराराऊ में भी सत्संग की अनुमति के लिए कई पार्टियों के नेताओं ने अपने सिफारिशी पत्र भी आवेदन के साथ लगाए थे. इससे ये स्पष्ट हो रहा है कि एक बड़े वर्ग को साधने के लिए राजनीतिक दल बाबा से जुड़े और फंडिंग कर रहे थे. फिलहाल इसको लेकर भी जांच एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी है.

हाथरस सत्संग के लिए 70 लाख से अधिक हुआ था चंदा

पुलिस को ये भी पता चला है कि इस सत्संग के लिए 70 लाख से अधिक चंदा इकठ्ठा हुआ था. हाथरस जिले के फुलरई मुगलगढ़ी गांव में सत्संग के आयोजन के लिए पिछले एक महीने से तैयारी चल रही थी और चंदा इकठ्ठा किया जा रहा था. कोई ऑनलाइन तो कोई कैश पैसा बाबा को भेज रहा था. बताया जा रहा है कि चंदा इकठ्ठा करने के लिए 30 से अधिक लोग गांव में टीम बनाकर घूम रहे थे. चंदा देने वालों में 100 से 20 हजार तक देने वाले भी शामिल थे. कहा जा रहा है कि जब समिति के लोग चंदा इकठ्ठा कर लेते थे तो वो मधुकर को सौंप देते थे जिसे बाद में ट्रस्ट में जमा कर दिया जाता था. तो वहीं चर्चा ये भी है कि चंदा इकठ्ठा करने वाले भी इसमें से 30 फीसदी रकम अपने पास ही रख लिया करते थे. इस तरह से केवल 70 फीसदी पैसा ही ट्रस्ट में जमा होता था. इसकी कोई रसीद नहीं दी जाती थी बल्कि डायरी में केवल लिखा जाता था.

अधिकारी और कर्मचारी भी जुड़े

पूछताछ में सामने आया है कि देवप्रकाश मधुकर खुद एटा जिले में मनरेगा में तकनीकी सहायक के रूप में तैनात है. खबर सामने आई है कि बाबा की समिति से कई सरकारी विभागों के अधिकारी व कर्मचारी भी जुडे हैं. फिलहाल पुलिस ने अब समिति की भी जांच शुरू कर दी है. पुलिस को जानकारी मिली है कि एक विभाग में तो बाकायदा बाबा का फोटो लगा हुआ था और जब हाथरस हादसा हुआ तो तस्वीर हटा दी गई है. इसके अलावा सेवानिवृत अधिकारी भी बाबा की समिति से जुड़े हैं और सत्संग का आयोजन कराते हैं. माना जा रहा है कि पुलिस के सामने ऐसे कुछ सेवानिवृत अधिकारियों के नाम भी सामने आए हैं जो बाबा की समिति से जुड़े हैं और कहा जा रहा है कि पुलिस उनसे भी पूछताछ कर सकती है.

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दीपक साहू

संपादक

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