पुणे कार दुर्घटना में नाबालिग की मां पुलिस जांच के घेरे में, शिवानी अग्रवाल की तलाश में जुटी क्राइम ब्रांच

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महाराष्ट्र
पुणे/स्वराज टुडे: पुणे पोर्श कार दुर्घटना मामले में नाबालिग के ब्लड सैंपल के साथ छेड़छाड़ के आरोप में दो डाक्टरों को गिरफ्तार किए जाने के बाद पुलिस कुछ संदिग्धों के ब्लड सैंपल लेकर उनकी जांच कर सकती है।

पुलिस को शक है कि नाबालिग की मां के सैंपल के साथ ही उसके ब्लड सैंपल को बदला गया था। हालांकि, शिवानी अग्रवाल अपने आवास पर नहीं हैं।

तलाश में जुटी क्राइम ब्रांच

सूत्रों के अनुसार, पुणे क्राइम ब्रांच शिवानी अग्रवाल की तलाश कर रही है। पल्लवी सैपले की रिपोर्ट के अनुसार, ससून में ब्लड सैंपल बदलने के उद्देश्य से एक महिला और दो बुजुर्गों के ब्लड सैंपल लिए गए थे। गौरतलब है कि 19 मई को नाबालिग ने पुणे में देर रात बाइक पर जा रहे दो आइटी इंजीनियरों को अपनी पोर्श कार से टक्कर मार दी थी, जिसके कारण दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।

पुलिस ने 10 लोगों को किया गिरफ्तार

जानकारी के अनुसार, नाबालिग नशे में कार चला रहा था और कार का रजिस्ट्रेशन भी नहीं किया गया था। इस मामले में पुलिस ने अब तक करीब 10 लोगों को गिरफ्तार किया है। वहीं ससून जनरल अस्पताल के डीन को जांच पूरी होने तक अनिवार्य छुट्टी पर भेज दिया गया है। दो पुलिस अधिकारियों को भी निलंबित कर दिया गया है।

डॉ तावडे पर लिंग परीक्षण रिपोर्ट में भी हेरफेर का आरोप

कार दुर्घटना मामले में गिरफ्तार डा अजय तावड़े पर जुहू के एक पूर्व कस्टम आयुक्त ने आरोप लगाया है कि पांच साल पहले एक वैवाहिक विवाद में उनकी अलग रह रही बहू की लिंग परीक्षण रिपोर्ट में हेरफेर किया था। उन्होंने कहा कि तावड़े और अन्य के खिलाफ मेडिकल काउंसिल आफ इंडिया के साथ-साथ महाराष्ट्र के मुख्य सचिव के पास शिकायत दर्ज की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।

पूर्व कस्टम आयुक्त के बेटे की शादी 2013 में हुई थी, लेकिन उनकी बहू ने अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इन्कार कर दिया। जब उन्होंने उसके जन्मस्थान औरंगाबाद में उसके मेडिकल इतिहास और जन्म प्रमाण पत्र की जांच की, तो पाया कि वह 1984 में एक पुरुष के रूप में पैदा हुई थी। दस साल बाद नगर निगम ने एक नया जन्म प्रमाण पत्र जारी किया, जिसमें उसका लिंग महिला बताया गया।

बहू ने परिवार के खिलाफ दहेज उत्पीड़न का मामला दायर किया और मामला अंधेरी की एक अदालत में पहुंच गया। 2018 में कोर्ट ने महिला का लिंग परीक्षण कराने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि ससून अस्पताल में डा तावड़े व अन्य डॉक्टरों ने जांच के बाद फरवरी 2019 में एक रिपोर्ट दी थी कि वह आनुवंशिक रूप से महिला थी। उन्होंने दावा किया कि परीक्षण पुणे में नहीं बल्कि औरंगाबाद में किया जाना चाहिए था और डा तावड़े ने रिपोर्ट में हेरफेर किया।

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दीपक साहू

संपादक

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