तीसरे टर्म में पीएम मोदी के लिए आसान नहीं होगा सरकार चलाना, जानिए कहां कहां आएंगी दिक्कतें

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नई दिल्ली/स्वराज टुडे: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहली बार वास्तविक रूप से गठबंधन सरकार चलाने की चुनौती मिल रही है। वह 22 साल तक पूर्ण बहुमत वाली बीजेपी सरकार चलाने के अभ्यस्त रहे हैं। लेकिन, यह भी तय है कि उन्हें सरकार चलाने का जो जनादेश मिला है, उसमें कोई भानुमति का कुनबा जोड़ने की जरूरत भी नहीं है।

मौजूदा परिस्थितियों बीजेपी को सिर्फ टीडीपी और जेडीयू के सहयोग की ज्यादा आवश्यकता है, बाकी तरफ से ज्यादा अड़चनें पैदा होने के हालात नहीं है। पीएम मोदी को एनडीए संसदीय दल की बैठक में चंद्रबाबू नायडू और नीतीश कुमार समेत सहयोगी दलों के अन्य नेताओं ने जिस तरह से उनके साथ सरकार चलाने की मंशा दिखाई है, वह इसके भविष्य के बारे में काफी कुछ देता है।

विशेष राज्य का दर्जा

नायडू के बेटे और टीडीपी के राष्ट्रीय महासचिव नारा लोकेश ने ईटी को एक इंटरव्यू दिया है, जिसमें यही संकेत छिपा है कि प्रधानमंत्री मोदी को गठबंधन सरकार चलाने में भी कोई खास दिक्कत नहीं आने वाली है। सबसे बड़ी बात कि आंध्र प्रदेश को विशेष राज्य का दर्जा देने की जिस मांग पर 2018 में नायडू एनडीए से बाहर निकले थे, अब टीडीपी उससे वह पीछे हट चुकी है।

मोदी ने भी लगाए ठहाके

लोकेश ने साफ किया है कि उनकी पार्टी ने एनडीए को बिना शर्त समर्थन दिया है और किसी भी तरह की उनकी कोई मांग भी नहीं है। वह सिर्फ राज्य के विकास में केंद्र की सहायता चाहते हैं। उनका कहना है, ‘हम आंध्र प्रदेश को दक्षिण भारत का इलेक्ट्रोनिक्स मैन्युफैक्चरिंग हब बनाना चाहते हैं। इसे ऑटोमोटिव इंडस्ट्री का क्लस्टर और स्पोर्ट्स हब बनाना है, हमारी लंबी तटीय रेखा पर बंदरगाह बनाकर इसे दक्षिण का गेटवे बनाना है। स्पेशल स्टैटस से विकसित राज्य पैदा नहीं होता।’ टीडीपी और बीजेपी के लिए विकास गाइडिंग फोर्स है, इसलिए इस फ्रंट पर सरकार को दिक्कत होगी, ऐसा लगता नहीं।

न्यूनतम साझा कार्यक्रम

पीएम मोदी को यह सरकार चलाने में दिक्कत नहीं होगी, इसका दूसरा संकेत ये है कि टीडीपी न्यूनतम साझा कार्यक्रम जैसे विषयों के चक्कर में उलझना नहीं चाहती। नारा लोकेश कहते हैं कि इससे बिना मतलब की देरी होती है और नायडू और मोदी दोनों बहुत ही सीनियर नेता हैं, जिनमें इसको लेकर काफी स्पष्टता है। वे अपने पिता के बारे में कहते हैं कि उन्हें गठबंधन सरकार चलाने की संवेदनशीलता की समझ है। अगर कोई विषय आएगा तो हम मिल बैठकर चर्चा कर लेंगे। मतलब, टीडीपी सरकार चलाने में सक्रिय सहयोग देने का संकेत दे रही है।

कॉमन सिविल कोड

इस बार के लोकसभा चुनाव में बीजेपी पूरे देश में कॉमन सिविल कोड लागू करने का भी वादा कर चुकी है। यह ऐसा संवेदनशील विषय है, जिसे अटल बिहारी वाजपेयी को एनडीए सरकार चलाते समय ठंडे बस्ते में रखना पड़ा था। आर्टिकल 370 और अयोध्या में राम मंदिर दो अन्य ऐसे ही मुद्दे थे। टीडीपी का अब यूसीसी पर स्टैंड सॉफ्ट हो चुका है। नारा ने कहा है कि ‘हम विधेयक देख चुके हैं और जबतक किसी खास समुदाय के साथ भेदभाव नहीं किया जाता, हम इसका पूरी तरह से समर्थन करते हैं।’ मतलब, एनडीए सरकार चलाने में यह भी कोई विवाद का मुद्दा नहीं रहेगा।

जेडीयू ने भी इस विषय पर यही लाइन ली है। पार्टी नेता केसी त्यागी ने कहा है, ‘हम यूसीसी के खिलाफ नहीं हैं। लेकिन, सभी स्टेकहोल्डर्स के साथ चर्चा होनी चाहिए, मुख्यमंत्रियों, राजनीतिक दलों, विभिन्न संप्रदायों के साथ और इसका समाधान खोजा जाना चाहिए।’

अग्निपथ योजना

अग्निपथ योजना के खिलाफ विपक्षी इंडिया ब्लॉक ने इन चुनावों में बहुत ज्यादा माहौल तैयार किया है। एनडीए के कुछ सहयोगी दलों को भी इसको लेकर कुछ चिंताएं हैं। जेडीयू नेता ने कहा है, ‘अग्निपथ योजना को लेकर युवाओं के एक वर्ग में गुस्सा है। हम इसे खत्म करने के लिए नहीं कह रहे हैं। लेकिन, हम निश्चित रूप से ये सोचते हैं कि इसमें अगर कुछ दिक्कतें हैं, तो उन्हें हटा दिया जाना चाहिए।’

अब बीजेपी की ओर से भी इस तरह के संकेत दिए जा रहे हैं कि अगर अग्निपथ योजना में किसी तरह की कोई खामी है तो उसमें सुधार किया जा सकता है। मतलब, इस विषय पर भी एनडीए में सबकुछ चंगा ही दिख रहा है।

मुस्लिम आरक्षण

इस लोकसभा चुनाव में विपक्षी इंडी गठबंधन के खिलाफ बीजेपी और पीएम मोदी ने मुस्लिम आरक्षण को बहुत बड़ा मुद्दा बनाया है। राजनीति के जानकार बताते हैं कि इस बार मुसलमान वोटरों ने बहुत ही आक्रमकता के साथ बीजेपी को हराने की रणनीति के साथ वोटिंग की है, जिसका यही कारण है।

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एक बार फिर नरेंद्र मोदी के पैर छूते नजर आए नीतीश कुमार लेकिन, टीडीपी आंध्र प्रदेश में मुस्लिम आरक्षण की वकालत इस चुनाव में भी कर चुकी है। नारा लोकेश का अभी भी कहना है कि जहां तक आंध्र प्रदेश का मामला है तो ‘हम मुसलमानों को आरक्षण उपलब्ध करवाना जारी रखेंगे।’ ऐसे में यह मुद्दा आगे चलकर एनडीए सरकार और पीएम मोदी के लिए चुनौती साबित हो सकती है।

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दीपक साहू

संपादक

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